Live avarage or innovate yourself




क्या आपने अपने जीवन में कभी हार मानी है? फिर से उठने के लिए खुदको कैसे प्रेरित किया?
पहले एक बाज़ की सच्ची कहानी सुनते हैं। एक बाज़ जाना जाता है अपनी लम्बी उड़ानों के लिए और पक्षियों में सबसे ताकतवर पक्षी होने के लिए। लेकिन एक बाज़ की उम्र जब 40 साल की हो जाती है, तब उसके शरीर में कुछ परिवर्तन आते हैं।
पहला परिवर्तन यह की उसकी चोंच मुड़ जाती है जिस से उसको खाना खाने में तकलीफ होती है।
दूसरा परिवर्तन यह की उसके पंजे मुड़ जाते हैं जिस से उसको अपना शिकार पकड़ने में तकलीफ होती है।
तीसरा परिवर्तन यह की उसके पंख भारी हो जाते हैं और शरीर से चिपकने लगते हैं और ऐसा होने की वजह से बाज़ अपने पंखों को पूरी तरह नहीं फैला पाता जिस से उसकी उड़ान छोटी हो जाती है
अब बाज़ के पास 2 रास्ते हैं। पहला यह की जो हो रहा है उसे वह स्वीकार कर ले और बाज़ होते हुए एक गिद्ध की ज़िन्दगी जिए। दूसरों के बचे हुए खाने को खाये, जिन लम्बी उड़ानों के लिए वह जाना जाता है, अब उड़ाने भरना छोड़ दे और लाचारी भरी ज़िन्दगी जिए। भगवान् को कोसता रहे की आपने मेरे साथ ही ऐसा क्यों किया।
लेकिन दूसरा रास्ता भी है जिसपर चलकर कुछ कठिनाईओं का सामना करना पड़ता है। बाज़ किसी ऊंची पहाड़ की तरफ चल पड़ता है और रहने लगता है।
वह अपनी मुड़ी हुयी चोंच को पत्थरों पर मार मारकर तोड़ देता है
। किसी भी पक्षी के लिए चोंच का टूटना सबसे दर्दनाक होता है। लेकिन बाज़ इस पीड़ा को सेहता है।
फिर वह अपने पंजों को भी पहाड़ के पत्थरों पर मार मारकर तोड़ देता है।
और अंत में वह एक एक करके अपने सारे पुराने पंखों को नोच कर निकाल फेंकता है।
यह सब करने में उसे काफी पीड़ा का सामना करना पड़ता है, लेकिन कुछ दिनों के इंतज़ार के बाद, चमत्कार होता है।
बाज़ ने जो अपनी चोंच तोड़ी थी, उसके बदले एक नयी चोंच उग जाती है जो पहले की तरह सीधी होती है।
उसके नए पंजे उग जाते हैं जो पहले की तरह धारदार होते हैं और धीरे धीरे उसके नए पंख भी निकल आते हैं जो पहले की तरह फुर्तीले और हलके होते हैं।
कुछ समय की पीड़ा सहने और इंतज़ार करने के बाद, वह बाज़ उस पहाड़ से अपनी उड़ान भरता है जो पहले की तरह ऊंची और लम्बी होती है।
इसीलिए बाज़ को पक्षियों का बादशाह कहा जाता है क्यूंकि वह अपनी किस्मत को स्वीकार ना करते हुए, खुदके लिए नयी ज़िन्दगी चुनता है। ऐसा करने से बाज़ 40 साल और जीता है।
कभी कभी ज़िन्दगी में ऐसा समय आता है जब हम हार मान लेते हैं। लेकिन कोई हारता तभी है जब वह अपनी हार स्वीकार कर ले। मैं भी जब जब हारा हूँ, हमेशा इस कहानी को फिर से याद करता हूँ और खुदको कुछ समय के लिए सबसे अलग कर के अपने कौशल पर काम करता हूँ।

द्वारा लिखित :- करन समल
श्रेय:- करन समल

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