क्या उन कंपनियों के शेयर खरीदना सही फैसला है जिन कंपनियों में राकेश झुनझुनवाला जैसे दिग्गजों ने निवेश किया है?


क्या उन कंपनियों के शेयर खरीदना सही फैसला है जिन कंपनियों में राकेश झुनझुनवाला जैसे दिग्गजों ने निवेश किया है?


हमे राकेश झुनझुनवाला जैसे बड़े निवेशकों के सिर्फ अच्छे निवेश दिखाई देते हैं, लेकिन उन निवेश को हम नज़र अंदाज़ कर देते हैं जिनमे उन्होंने पैसा गंवाया है।
जानते हैं कुछ ऐसी कंपनियों के बारे में जिसमे निवेश करके राकेश झुनझुनवाला ने पैसे गंवाए हैं।
: झुनझुनवाला ने इस बैंक में 4% हिस्सेदारी खरीद ली थी। और इस बैंक के शेयर जितने गिरते वो उतना खरीदते। सालों होल्ड करने के बाद भी जब घाटा बढ़ता ही गया, तो उन्होंने अपने सारे शेयर बेच दिए।
जिन निवेशकों ने उन्हें देखकर निवेश किया था उन्हें पता भी नहीं चला की राकेश झुनझुनवाला ने अपने शेयर बेच दिए हैं, क्योंकि झुनझुनवाला ने एक दिन में नहीं बेचा। थोड़ा थोड़ा करके पूरे महीने भर बेचा।
इसके अलावा आयन एक्सचेंज,हिन्द आयल एक्सप्लोरेशन तथा  रिलायंस ब्रॉडकास्ट कुछ ऐसी कंपनियां हैं जिनमे झुनझुनवाला ने निवेश तो कर दिया था लेकिन इन कंपनी के शेयर में वॉल्यूम इतना कम हो गया की शेयर के दाम धड़ाधड़ गिरने लगे।
 कुछ ऐसी कंपनियां हैं जिनमे झुनझुनवाला ने निवेश तो कर दिया था लेकिन इन कंपनी के शेयर में वॉल्यूम इतना कम हो गया की शेयर के दाम धड़ाधड़ गिरने लगे।
झुनझुनवाला का इन निवेशों में से निकल पाना ही मुश्किल हो गया था। इन्हे देखकर बहुत सारे छोटे निवेशकों ने भी शेयर खरीदे हुए थे।
फिर कर्वी (Karvy) ने झुनझुनवाला के लिए बल्क डील करवाकर उन्हें इन निवेशों में से निकलवाया वह भी बहुत ज्यादा घाटे में।
छोटे निवेशकों को पता भी नहीं चला की कब बल्क डील हो गया और झुनझुनवाला ने शेयर बेच दिए
। एक महीने बाद जब स्टॉक एक्सचेंज से रिपोर्ट आया तब सबको पता चला। लेकिन वॉल्यूम इतना कम था की
 अपने शेयर बेच ही नहीं पा रहे क्योंकि कोई खरीदने वाला ही नहीं है।
एक सबसे बड़ा उदाहरण है अपटेक (Aptech) का
। अपटेक कंपनी देश भर में कोचिंग और ट्रेनिंग सेंटर चलाती है। झुनझुनवाला ने 2006 को इस कंपनी में 30 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
इस बार तो झुनझुनवाला को देखकर छोटे निवेशक नहीं बल्कि कुछ बड़े निवेशक भी मोहित हो गए और इस कंपनी के शेयर खरीद लिए।
बाज़ार में इतना जोश भर गया इस कंपनी को लेकर की 1 साल में ही कंपनी के शेयर 200 से 450 रुपये पहुँच गए।
लेकिन लगातार खराब वित्तीय आंकड़े आने के बाद कंपनी के शेयर गिरने लगे, बड़े निवेशक निकल गए, झुनझुनवाला ने और शेयर खरीद लिए, छोटे निवेशक जो खुदको लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर समझते थे उन्होंने भी और शेयर खरीद लिए।
शेयर 450 से गिरकर वापस 200 पे आया, फिर 200 से गिरकर 100 पे, फिर 100 से 50 पे
हताश होकर सभी छोटे निवेशकों ने शेयर बेच दिए। लेकिन झुनझुनवाला और खरीदते गए और कंपनी के बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स में शामिल हो गए। अब तो कंपनी के चेयरमैन बन गए हैं। उनके चेयरमैन बनते ही एक नया जोश दिखा और शेयर के दाम 50 से बढ़कर फिर 100 रुपये हो गए हैं।
इन सब घटनाओं से क्या सीखने को मिलता है?
यही की राकेश झुनझुनवाला जैसे निवेशक अगर किसी कंपनी में निवेश करते हैं तो उसके पीछे का कारण सिर्फ उन्हें ही पता होता हो। क्या यह लम्बी अवधि का निवेश है? या ट्रेडिंग पोजीशन है? या वह सिर्फ कंपनी की मदद कर रहे हैं कुछ शेयर खरीदकर? जो भी हो असली कारण हम लोगों को नहीं पता होता है।
इसीलिए आँख बंद करके इन लोगों को फॉलो नहीं करना चाहिए, खुद का भी दिमाग लगाना चाहिए।

द्वारा लिखित :- अबिराह पूनावाला (Aabirah Poonawala)

No comments: