'नवाजुद्दीन सिद्दीकी' एक वॉचमैन से सुपरस्टार बनने तक का सफर ।


'नवाजुद्दीन सिद्दीकी' एक वॉचमैन से सुपरस्टार बनने तक का सफर



नमस्कार दोस्तो, आज हम बात करेंगे फ़िल्म जगत के एक महान कलाकार "नवाज़ज़ुद्दीन सिद्दीकी के बारे में | एक ऐसे कलाकार जो अपने किरदार को बखूबी निभाते है | ये जब भी अपनी फिल्म में अपने डायलॉग्स बोलतें है तो इनके किरदार में एक अलग सी वास्विकता झलकती है | इनका अभिनय सभी को रोमांचित कर जाता है फिर चाहे वो 'केतन मेहता' द्वारा निर्देशित "मांझी: द माउंटेन मैन" हो या नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज "सेक्रेड गेम्स" हो वो अपना किरदार बखूबी निभाते है |
सिद्दीकी का जन्म 19 मई 1974 को उत्तर प्रदेश शामली जिले में एक छोटे से शहर,लधनाडारो के जमींदारी मुस्लिम परिवार में हुआ | वे अपने आठ भाई-बहनो में सबसे बड़े है | सिद्दीकी के वहां केवल तीन चीजे प्रसिद्ध थी और वो थी गेहू,गन्ना और गन | वहां के माहौल को देखकर वो वहां से बाहर निकलना चाहते थे |
उन्होंने गुरुकुल कांगड़ी विश्व विद्यालय, हरिद्वार से रसायन विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की | इसके बाद उन्होंने नई नौकरी की तलाश में दिल्ली रवाना होने से पहले वड़ोंदरा में एक साल तक रसायनज्ञ के रूप में काम किया | सिद्दीकी को यह कार्य बिल्कुल पसंद नही था लेकिन आर्थिक स्तिथि सही न होने के कारण, मजबूरन वे नौकरी करने के लिए विवश थे |
एक बार उनका एक मित्र उन्हें एकक गुजराती नाटक दिखाने अपने साथ मे ले गया | वह नाटक उन्हें इतना पसंद आया कि मानो उन्हें अपने जीवन का लक्ष्य मिल गया हो | उन्होंने अब ठान लिया था कि अब उन्हें कलाकार ही बनना है |
इसके लिए उन्होंने नई दिल्ली में स्थित "नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा"(NSD) में प्रवेश लेने का निश्चय किया और उसी के मानदंडों में से एक को पूरा करने के लिए दोस्तों के एक समूह के साथ दस से अधिक नाटको में अभिनय किया |
सिद्दीकी ने बॉलीवुड में अपनी शुरुआत वर्ष 1999 में आमिर खान द्वारा अभिनीत फ़िल्म 'सरफरोश' में एक छोटी भूमिका के साथ की | फिर वे रामगोपाल वर्मा की 'शूल'(1999) , 'जंगल'(2000) और राजकुमार हिरानी की 'मुन्नाभाई एमबीबीएस' (2003) में दिखाई दिए | मुम्बई जाने के बाद उन्होंने टेलीविज़न धारावाहिको में कामकरने की कोशिश की लेकिन उन्हें ज्यादा सफलता नही मिली | स्थिति धीरे-धीरे और खराब होती जा रही थी |
उन्होंने वर्ष 2003 में एक लघु फ़िल्म, 'द बायपास' में काम किया जिसमें वे इरफान खान के साथ दिखाई दिए | इसके अलावा वर्ष 2002 से 2005 तक उन्हें कोई काम नही मिला |
वो एक फ्लैट में चार अन्य लोगो के साथ रहते थे | वहां भी उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ रहा था | कई बार तो उन्हें अपनी भूख मिटाने के लिए खाना तक नसीब नही होता था | जेब मे एक फूटी कौड़ी तक नही बची थी | जब भी फ्लैट के किराया देने के बात आती तो कुछ न कुछ अभिनय करके बात को टाल देते थे | ये उनका अब तक का सबसे कठिन समय था | उन्ही काफी बार लगता था कि बस अब मुझे वापस चला जाना चाहिए लेकिन कभी हिम्मत नही हो पाई क्योंकि उन्होंने अब मन ही मन निश्चय कर लिया कि अब इतनी दुर आ गए है...इस लक्ष्य के लिए इतना अभ्यास किये है तो इसे पाना ही है | उन्होंने अपने सामने कभी दूसरा विकल्प रखा ही नही और अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ते चले गए |
'नवाजुद्दीन सिद्दीकी' एक वॉचमैन से सुपरस्टार बनने तक का सफर

वर्ष 2009 में उन्होंने फिल्म 'देव डी' में रंगीला की भूमिका में "भावुक अताइशर" गीत में एक कैमियो भूमिका में अपने जोड़ीदार रसीला के साथ दिखाई दिए | हालांकि, यह अनुषा रिजवी की 'पिपली लाइव'(2010) में एक पत्रकार की भूमिका थी , जिससे पहली बार उन्हें एक अभिनेता के रूप में व्यापक पहचान दिलाई| उनके इसी अभिनय को देखते हुए फ़िल्म निर्देशक 'अनुराग कश्यप' ने सिद्दीकी को अपनी फिल्म 'ब्लैक फ्राइडे' में किरदार दिया | इसके बाद वे 'प्रशांत भार्गव' की फ़िल्म , पतंग: द काइट (2012) में दिखाई दिए, जिसका प्रीमियर बर्लिन इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल और ट्रिबेका फ़िल्म फेस्टिवल में हुआ था | जिसके लिए सिद्दीकी के प्रदर्शन की प्रशंसा फ़िल्म समीक्षक 'रोजर एबर्ट' ने की थी | एक भूमिका जिसने "उनकी भूमिका को बदल दिया" | इसी के तुरंत बाद उन्होंने अनुराग कश्यप के गैंगस्टर महाकाव्य, "गैंग्स ऑफ वासेपुर" में अपना किरदार बखूबी निभाया | इसी तरह धीरे-धीरे वो सफलता की सीधी चढ़ते चले गए | हाल ही कि इनकी नेटफ्लिक्स वेब सीरीज "सेक्रेड गेम्स" को लोगो ने खूब सराहा | वो सबसे ज्यादा युवाओ में चर्चित रही |
'नवाजुद्दीन सिद्दीकी' एक वॉचमैन से सुपरस्टार बनने तक का सफर

✓इनके अनुसार सफलता का यही मूल मंत्र है कि आप अपना लक्ष्य निश्चित रखे,कोई अन्य विकल्प न रखे |

✓इन्होंने अपनी पहचान बनाने के लिए बारह साल तक कड़ा संघर्ष किया |

✓अपनी आर्थिक परीस्थितियो पर काबू पाने के लिए इन्होंने वाचमैन की नौकरी भी की |

✓वर्ष 2013 में सर्वश्रेश्ठ सहायक अभिनेता के लिए इन्हें फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार भी मिला |

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