सहनिर्भरता रिश्ता होता है हानिकारक, जानिए कैसे इससे निजात पाए।


सहनिर्भरता रिश्ता होता है हानिकारक, जानिए कैसे इससे निजात पाए।




प्यार एक एहसास है । एक ऐसा एहसास जिसे हर कोई महसूस करना चाहता है । कहा जाता है हर शख्स की जिंदगी प्यार पे ही चलती है । प्यार मनुष्य की जिंदगी ही नहीं बल्कि प्यार मनुष्य की जरूरत है जिसके बिना वह अपने आप को अधूरा पाता है । इस प्यार की जरूरत बच्चे के पैदा होने से बुजुर्ग होने तक रहती है । जब भी प्यार का रिश्ता जैसे लफ्ज़ की बात आती है तो यह पाया जाता है कि जोड़े में एक व्यक्ति मानसिक तौर पर अपने आप को कमजोर बना लेता है वह अपने साथी के ऊपर ज्यादा निर्भर रहता है जिसे हम अंग्रेजी में कोडपेंडेंसी कहते हैं । इसमें कमजोर व्यक्ति अपने आप को काफी असहाय महसूस करता है, अगर भावनात्मक मजबूत व्यक्ति दूसरे के आस पास न हो तो वह गुस्से में रहता है ,एवं अपने आप को बीमारी के चपेट में ढकेल देता है । यदि आप कोडपेंडेंसी की खोज किसी व्यक्ति में करने निकलेंगे तो यह पाएंगे कि इसके लक्षण हर प्रेमी जोड़े में आसानी से मिल जाता है, हालांकि इसके कुछ अंश परिवार में भी मिल जाता है उदहारण दिया जाए तो आप भारतीय परिवार में अमूमन पाएंगे कि बच्चों को अपने माता-पिता पर इतना निर्भर पाया जाता है कि अगर उनके माता पिता कुछ पल के लिए उनके आसपास न हो तो बच्चे बेचैन से हो जाते हैं । यह भी सत्य है कि निर्भरता या यूं कहें अपनो का समर्थन करना गलत नहीं बल्कि यह प्यार के रिश्ते को मजबूत करता है पर जरूरत से ज्यादा निर्भरता इंसान के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचा सकता है ।

कैसे पहचानें की आपका रिश्ता निर्भरता पर आधारित है ।


किसी पर भी निर्भरता होना इंसान को भीतर से कमजोर बना देता है । व्यक्ति अपने रिश्ते को बनाके रखने के लिए दूसरे व्यक्ति की हर गलती को नजरंदाज कर देता है । वह अपने आप को दोषी मानता है उन सब गलतियों के लिए जो उसने नहीं बल्कि उसके साथी ने की हो । एक सच्चा रिश्ता कभी आपको समाज से अलग नहीं करता परन्तु अगर आप एक कोडिपेंडेंट रिश्ते में बंधे हुए हैं तो आप समाज एवं परिवार से बिछड़ से जाते हैं । आपका व्यवहार और मूड आपकी साथी के ऊपर आधारित रहता है । आप अपनी भावनाओं को लगातार नकारते हैं और उन्हें स्वीकार नहीं करते हैं। यह ऐसा है जैसे आपको अपने साथी की स्वीकृति की आवश्यकता है ताकि आप खुद पर ध्यान दे सकें।

इसे रिश्ते से कैसे निकलें


इस मुसीबत से निकलने का सबसे प्रमुख होता है अपने साथी से बातचीत करें उन्हें समझाए या रिश्ते के नए आयाम स्थापित करें । अगर आपका साथी या आप एक दूसरे को अच्छी तरह से समझते हैं तो यह बात भी अच्छी तरह समझेंगे । प्यार में बातचीत की बहुत आवश्यकता रहती है ताकि यह अनमोल रिश्ता भविष्य तक मजबूत रहें । अपनी भावनाओं, जरूरतों और इच्छाओं को व्यक्त करना सीखें। अपने साथी के साथ घूमने जरूर जाएं परन्तु अपने परिवार अपने दोस्तों के साथ भी मिलने का समय निकालें । ऐसे रिश्ते में तनाव होना भी स्वभाविक है तो सबसे सटीक जानकारी प्राप्त करने के लिए लाइफ कोच की सहायता भी आप लें सकते है।

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